नई टिहरी/ लंबगांव (सुरेन्द्र प्रसाद भट्ट)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हिंदू सम्मेलन में हिंदू राष्ट्र बनाने और सनातन धर्म के अनुरूप अपना आचरण व एक दूसरे से कुशल व्यवहार करने पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू शब्द की उत्पत्ति सिंधु सभ्यता से हुई थी लेकिन सनातन धर्म की शुरुआत और अंत का कोई पता नहीं है, हिंदू ही सनातन है। हिंदू समाज को जगाने का काम सभी सनातनी का है, उन्हें पंच परिवर्तन को अपने जीवन में स्वयं से उतारना चाहिए।
फूल सिंह बिष्ट राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में नगर पंचायत अध्यक्ष रोशन रांगड की अध्यक्षता में श्री सेम नागराज हिंदू सम्मेलन समिति के द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन के मुख्य अतिथि नैताला एवं दिन्याली देवी धाम के स्वामी रामभद्राचार्य, मुख्य वक्ता आरएसएस के प्रांत धर्म जागरण संयोजक नारायण ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए हिंदू समाज की संस्कृति, परंपराओं को जीवंत रखने और विभिन्न कारीगरी के माध्यम से स्वयं काम करने वाले लोगों को भारत माता का चित्र और पटका पहनाकर सम्मानित किया। सम्मेलन में सरस्वती विद्या मंदिर, शिशु मंदिर, रामकृष्ण पब्लिक स्कूल सहित अन्य स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने देश भक्ति गुणगान से लेकर देवी देवताओं के जागरणों की शानदार प्रस्तुतियां दी। रामभद्राचार्य ने कहा कि धर्म के अनुरूप जीवन का लक्ष्य मानव कल्याण है। लेकिन वर्तमान में अधर्म का प्रचार ज्यादा हो रहा है। मानव धर्म के काम को छोड़कर धन अर्जित करने में लगा हुआ है। सनातन के अनुसार हमारा आचरण, व्यवहार और कार्य कुशल होना चाहिए। मुख्य वक्ता नारायण ने कहा कि हमारी संस्कृति में जितने भी संस्कार है, वह वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है। पूरा विश्व भारत की सनातन संस्कृति से सीखने की कोशिश करता है।भारत विश्व को ज्ञान देने का काम कर रहा है। पंच परिवर्तन का एक बोध है, स्वयं को जानना। जन्मदिन पर अपने बच्चों से केक काटने की आदत छोड़ पेड़ लगाने की आदत डालें। संकल्प करो कि हिम प्रदेश को समृद्ध करें। संघ शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर समाज के परिवर्तन के लिए काम कर रहा है, जिसमें कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण, जल प्रबंधन, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य शामिल है।
